Saturday, February 04, 2006

प्रियंका

6th aug.1998
Inspiration:For my lovin sis who wanted me to write something on her name..


उम्मीद लगाए बैठा हूं फिर भी है मन में शंका
क्या मुझे मिल जएगी मेरी प्रियंका...

सारंग के सुर हों या धुन हो म्रिदंग का
छू जाते हैं दिल को,हर लेते हैं मन को
हो जाते हैं वो प्रिये, कहलाते हैं प्रियंका....

सागर रुपि प्रिये से मिलने,बन जाने गहना उनके तन का
टोङ देते है हर दीवार को,चाहे हो पथ्थर या हो वेग पवन का
मिल जाते है प्रिये से,कहलाते है प्रियंका......

भंवरे पुष्प् रस पीने को व्याकुल, हो हर्शित कण कण मन का
सर्प चंदन से लिपटने को आतुर,हो पुलकित रोम बदन का
मिल जाते हैं प्रिये से,कहलाते हैं प्रियंका....

हर कोइ अपने जीवन में, बन जाए साथी किसी के जीवन का
उम्मीद लगाए बैठा हूं, फिर भी है मन में शंका
क्या मुझे मिल जाएगी , मेरी प्रियंका...........

3 Comments:

Anonymous Archana said...

kya mil jaayegi tumhe priyanka...??
chennai mein to chances kam hain :)
well,nice one....keep it up...

3:25 AM  
Blogger Voice said...

hum dua karenge ki tumhe tumhari priyanka mil jaye.
mil jaye to jaane mat dena.

nice poem

11:11 AM  
Anonymous Anonymous said...

I have been looking for sites like this for a long time. Thank you! ice machine timer

2:12 AM  

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