Monday, February 13, 2006

रिश्ते

चुपचाप रहो,गुमनाम रहो,इन रिश्तों से अंजान रहो
सपने तो आंखो का नीर हैं
बस यूहीं छलक जाते हैं
ना पलकों पर पलती इन बूंदों को
इस जीवन का अरमान कहो
सांसे भरो तो ऐसे भरो कि
सांसो को भी एहसास ना हो
जो कहना है वो कह डालो पर
होठों पर अल्फ़ाज़ न हो
उस साये के पीछे मत जाओ
जिसे लोग रिश्ते कहते हैं
रिश्तों का क्या भरोसा
पानी के बुलबुले हैं
बनते है बिगडते रहते हैं
इन रिश्तो के पीछे मत भागो
इन रिश्तो से बेईमान रहो
चुपचाप रहो,गुमनाम रहो,इन रिश्तों से अंजान रहो


ये घने बादलों के वो रिश्ते हैं
जो खुशियों पर बस छाएंगे
ये झोंके हैं उन्माद पवन के
जो जिस्म उठा सकते नही
बस सांसें लेकर जाएगे
जो सांसे लेना है टो ले जाओ
पर ना जिस्म को यूं बदनाम् करो
चुपचाप रहो,गुमनाम रहो,इन रिश्तों से अंजान रहो
सागर से आती लहरों से कभी
उम्मीद की आस मे मत रहना
बस छूकर चली जाएगी वो
पीने की प्यास में मत रहना
ये वो म्रिग त्रिष्णा है जो
भरे हुएनयनो से भी हंसाती है
पहले तो धङकन देती है फिर
सांसे लेकर जाती है
जो रिश्तो की लहर ने नही छुआ
तो कुदरत का एह्सान कहो
चुपचाप रहो,गुमनाम रहो,इन रिश्तों से अंजान रहो

6 Comments:

Blogger Voice said...

definetly a good poem

1:18 PM  
Blogger anty said...

gud one again..ya i know that link i got from ur blog..was looking to read something in hindi so went there...neeways keep writing

8:02 PM  
Blogger Phoenix said...

wah wah:)))

u r magic!

10:09 PM  
Anonymous Anonymous said...

gud one yaar defintely d best devil

3:49 PM  
Anonymous Anonymous said...

in rishton se anjan rah kar mayne bhul jaoge hansi ke
aj daman thama hai jo sath bitao do pal khushi ke
in rishton me jeevan hai aur isme hi vo sansar hai
tum jise bhagwan kah baithe aur jiske liye tumhara nam pyar hai

4:37 PM  
Anonymous Anonymous said...

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